Wednesday, 26 June 2013

Aja saheli ta ripu shrikrishna


अजा सहेली ता रिपु, ता जननी भरतार।

ताके सुत के मित्र को भजा करे संसार॥



अभिप्राय है ‘अजा (बकरी) की सहेली (भेड़) के शत्रु (कांटों) की मां (पृथ्वी) के स्वामी (इंद्र) के पुत्र (अर्जुन) के मित्र (श्रीकृष्ण) को सारा संसार भजता है |

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